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✍️ विशेष आलेख : रमाकांत पाठक (शिक्षाविद)जयपुर

सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम में स्कूली विद्यार्थियों के लिए घोषित की जाने वाली छुट्टियों को लेकर एक बार फिर शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। शिक्षाविद रमाकांत पाठक का मानना है कि मौसमी परिस्थितियों के नाम पर बार-बार घोषित होने वाली छुट्टियां विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, अनुशासन और सहनशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
पाठक के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में यह एक परंपरा बनती जा रही है कि मौसम में जरा-सी तीव्रता आते ही सरकार द्वारा स्कूली अवकाश घोषित कर दिए जाते हैं। इससे जहां एक ओर वर्किंग-डे कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षण की निरंतरता बाधित हो रही है।

न्होंने कहा कि इन अप्रत्याशित मौसमी छुट्टियों के कारण विद्यार्थियों में अदृश्य लर्निंग गैप, स्किल्स में कमी और मौसम सहन करने की क्षमता में गिरावट देखी जा रही है।

पाठक का यह भी तर्क है कि मौसम के कारण बीमार पड़ने वाला बच्चा घर पर रहकर भी बीमार हो सकता है, जबकि स्कूल में अनुशासित वातावरण और नियंत्रित दिनचर्या होती है। छुट्टियों के दौरान अधिकांश बच्चे घर में स्थिर नहीं रहते, बल्कि अधिक स्वच्छंद होकर घूमते-फिरते हैं।
उन्होंने 2009 से पहले के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय के बच्चे तेज सर्दी, बारिश, कोहरा, धुंध और गर्मी को नजदीक से महसूस करते हुए बड़े हुए, जिससे उनकी शारीरिक व मानसिक सहनशीलता अधिक मजबूत रही।
स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की संयुक्त भूमिका पर जोर
रमाकांत पाठक का सुझाव है कि मौसमी छुट्टियों पर निर्णय लेने का अधिकार केवल सरकार तक सीमित न होकर स्कूल प्रबंधन और अभिभावक समितियों को संयुक्त रूप से दिया जाना चाहिए। इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर और व्यवहारिक निर्णय लिए जा सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभिभावकों को लगता है कि छुट्टियों के दौरान बच्चा घर की बजाय स्कूल में अधिक अनुशासित और सुरक्षित रहता है, तो वे स्कूल प्रबंधन से नियमित कक्षाएं संचालित करने का अनुरोध कर सकते हैं।

सरकार का पक्ष

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौसमी छुट्टियों का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना होता है। अत्यधिक सर्दी, गर्मी, बारिश, कोहरा या विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में बच्चों का स्कूल आना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में एहतियातन अवकाश घोषित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
सरकार का यह भी मानना है कि बच्चों की इम्युनिटी और स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर छोटे बच्चों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए।

अभिभावकों की मिली-जुली राय

अभिभावकों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ अभिभावक मौसमी छुट्टियों को आवश्यक मानते हैं, जबकि कई अभिभावकों का कहना है कि बार-बार अवकाश होने से बच्चों की पढ़ाई, दिनचर्या और अनुशासन प्रभावित हो रहा है।
कई अभिभावकों ने यह भी स्वीकार किया कि छुट्टियों के दौरान बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ जाता है और पढ़ाई से दूरी बन जाती है।

निष्कर्ष

मौसमी छुट्टियां सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी हो सकती हैं, लेकिन उनकी संख्या, अवधि और निर्णय प्रक्रिया पर पुनर्विचार आवश्यक है। शिक्षाविद रमाकांत पाठक की यह राय शिक्षा व्यवस्था में एक नई बहस को जन्म देती है—जहां संतुलन, स्थानीय निर्णय और सामूहिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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