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बीकानेर

आज 12 जनवरी को देशभर में स्वामी विवेकानंद की जयंती पूरे उत्साह और राष्ट्रभावना के साथ मनाई जा रही है। इसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। राजधानी से लेकर गांवों तक स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं के संगठनों द्वारा विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह से ही मंदिरों, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों में स्वामी विवेकानंद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कई स्थानों पर प्रभात फेरियां, योग शिविर, युवा संवाद, भाषण प्रतियोगिताएं और स्वामी जी के विचारों पर आधारित संगोष्ठियां आयोजित की गईं। सोशल मीडिया पर भी “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” जैसे प्रेरणादायक विचारों की गूंज दिखाई दी।

शिक्षा संस्थानों में आज विशेष प्रार्थना सभाएं रखी गईं, जहां विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को विश्व मंच पर पहचान दिलाई। 1893 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण आज भी युवाओं को आत्मविश्वास और स्वाभिमान का संदेश देता है।

देश के कई शहरों में युवा रैलियां और स्वच्छता व सेवा अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के सेवा और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को जमीन पर उतारना है। स्वयंसेवी संगठन गरीबों, जरूरतमंदों और बच्चों के लिए भोजन व शिक्षा सामग्री वितरण जैसे कार्यक्रम कर रहे हैं।

आज का दिन सिर्फ स्मरण का नहीं, बल्कि संकल्प का भी है — ऐसा संकल्प कि युवा शक्ति अपने चरित्र, ज्ञान और कर्म के बल पर भारत को सशक्त बनाएगी। स्वामी विवेकानंद की जयंती ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जाग्रत युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

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