कोचिंग सेंटर्स के खिलाफ निजी विद्यालय लामबंद
बीकानेर
नया सत्र 2026 – 27 शुरू होते ही फिर एक बार राजकीय और निजी विद्यालयों में डमी स्टूडेंट के प्रवेश को लेकर घमासान छिड़ चुका है निजी विद्यालयों का कहना है कि राजकीय विद्यालयों में विशेष रूप से विद्यार्थियों के नामांकन को बढ़ाने और अपने पदों की सुरक्षा के लिए विद्यार्थियों को डमी कैंडिडेट के रूप में प्रवेश देकर उन्हें कोचिंग में अध्ययन करने के लिए प्रेरित करने की साजिश रची जा रही है इस कारण विद्यार्थी अब निजी विद्यालयों की ओर अपना रुख नहीं कर पाते हैं सरकार ने कोचिंग के लिए भी नियम कायदे बनाए हैं लेकिन राजकीय विद्यालयों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मिली भगत के कारण यह नियम कायदे लागू नहीं हो पा रहे हैं कोचिंग संस्थान झूठा प्रचार प्रसार करके विद्यार्थियों को प्रलोभन देकर प्रवेश देते हैं l
अभिभावकों की पीड़ा
अभिभावकों का तर्क है कि राजकीय विद्यालयों में विषय अध्यापकों की कमी और निजी विद्यालयों की मोटी फीस के कारण अब अभिभावक भी अपने बच्चों को कोचिंग सेंटर में भेजने के लिए विवश है यदि सरकार राजकीय विद्यालयों में विषय अध्यापकों औऱ व्याख्याताओ की भर्ती करें और निजी विद्यालयों की फीस पर लगाम लगे तो कोचिंग सेंटर्स की ओर बच्चों को भेजने की आवश्यकता ही नहीं
शिक्षाविदों का मानना है कि विद्यार्थियों में विद्यालयों में नहीं जाने के कारण उनमें नैतिक शिक्षा, संस्कार और अनुशासन गिरावट देखने को मिल रही है