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*जिला कलक्टर ने दिखाई हरी झंडी*
बीकानेर, 13 फरवरी। राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने जिला प्रशासन व महिला अधिकारिता विभाग के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जागरुकता रथ व रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस दौरान महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया।
महिला अधिकारिता विभाग की उप निदेशक मेघा रतन ने बताया कि महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रचार सामग्री व पुस्तकें इस रथ में रखी गई है। यह रथ 63 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर प्रचार प्रसार करेगा। ग्राम पंचायत रासीसर व पारवा से अभियान की शुरूआत कर 63 ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इनमें कठपुतली कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक तथा आओ पढ़े अभियान के तहत रथ में स्थापित लाइब्रेरी द्वारा बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने तथा समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच का संदेश दिया जायेगा। जागरुकता रैली में महिलाओं द्वारा ‘नारी नहीं किसी से कम उनमें भी है पूरा दम’ में जैसे नारे लगाए गए। रैली कलक्ट्रेट परिसर से गांधी पार्क पहुँची, जहां पर उपनिदेशक मेघा रतन द्वारा महिला अधिकारिता की विभिन्न योजनाओं के बारे में व संरक्षण अधिकारी सतीश परिहार द्वारा राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी गई। रैली में विभाग की साथिने, आगनबाड़ी कार्यकर्ता व पर्यवेक्षकों द्वारा भाग लिया।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) अरूण प्रकाश शर्मा, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नित्या के., आई.जी.एन.पी के अधीक्षण अभियन्ता हरीश छतवानी सहित विभिन्न अधिकारीगण एवं महिलाएं उपस्थित थी।
कार्यक्रम में विभाग के उपनिदेशक, संरक्षण अधिकारी, पर्यवेक्षक, प्रोता. आई. एम. शक्ति केन्द्र, महिला एवं सलाह केन्द्र के कर्मचारी वर्चुअल कार्यक्रम से जुड़ कर भाग लिया ।
*इसलिए मनाया जाता है राष्ट्रीय महिला दिवस*
देश में हर साल 13 फरवरी को स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू की जयंती को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाई जाती है। वे हमारे की देश की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। सरोजिनी नायडू स्वतंत्रता आंदोलन की एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ कवियत्री भी थीं। उन्हें भारत कोकिला (नाइटिंगेल ऑफ इंडिया) कहा जाता है। वे देश की पहली महिला राज्यपाल भी रही। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका और दूसरे कार्यों के लिए सम्मानित करने के लिए उनकी जयंती को देश में राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष उनकी 142वीं जयंती मनाई जा रही है।

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