बीकानेर।
शुक्रवार से बीकानेर में बहुप्रतीक्षित कैमल फेस्टिवल का आगाज़ हो गया। पहले ही दिन शहर पूरी तरह रंग-बिरंगी लोकसंस्कृति, परंपराओं और उत्साह में रंगा नजर आया। सुबह शहर की ऐतिहासिक गलियों में हेरिटेज वॉक निकाली गई, जिसमें देशी-विदेशी पर्यटकों ने बीकानेर की विरासत को करीब से देखा।
दोपहर बाद मुख्य आयोजन स्थल पर मिस्टर बीकाणा, मिस मरवण और ढोला-मारू प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा, साज-सज्जा और अनूठे अंदाज से सभी का ध्यान खींचा।
इस वर्ष लखन पारिक को मिस्टर बीकाणा का खिताब मिला, वहीं मिस मरवण का ताज अंकिता सुथार के सिर सजा और ढोला-मारू प्रतियोगिता में किशोर कला विजेता बने।
16 श्रृंगार में सजी महिलाएं बनीं आकर्षण का केंद्र
मिस मरवण और ढोला-मारू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए 50 से अधिक महिलाएं पारंपरिक 16 श्रृंगार कर मंच पर पहुंचीं। बीकानेर की राष्ट्रीय स्तर की चेस खिलाड़ी युक्ति हर्ष भी पारंपरिक राजस्थानी परिधान और सोलह श्रृंगार के साथ प्रतियोगिता में शामिल हुईं, जिससे कार्यक्रम को विशेष गरिमा मिली।
मिस्टर बीकाणा में दिखा शौर्य और परंपरा का संगम
मिस्टर बीकाणा प्रतियोगिता में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से युवक पहुंचे। किसी ने 20 फीट लंबी मूंछें दिखाई तो कोई सिर पर 20 किलो का पत्थर बांधकर दमखम का प्रदर्शन करता नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा और अनोखी प्रस्तुतियों ने दर्शकों की तालियां बटोरीं।
पहले दिन के आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बीकानेर का कैमल फेस्टिवल केवल पर्यटन उत्सव नहीं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति, शौर्य और सौंदर्य का जीवंत उत्सव है। आने वाले दिनों में लोकनृत्य, ऊंट प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव को और भी रंगीन बनाएंगे।